एक छोटे से गाँव में एक शरारती बंदर और एक समझदार कुत्ता रहते थे। दोनों रोज़ गाँव की गलियों में घूमते और खूब मस्ती करते थे।
एक दिन बंदर ने देखा कि कुत्ता एक पेड़ के पास एक पैर उठाकर पेशाब कर रहा है। बंदर हँसते हुए बोला,
“कुत्ता भाई, तुम पैर उठाकर क्यों पेशाब करते हो? दोनों पैर नीचे रखकर क्यों नहीं करते?” 😂
कुत्ता मुस्कुराकर बोला,
“अरे बंदर भाई, ये हमारी आदत है। पैर उठाने से हमें पेड़ और जगह को अपनी पहचान की गंध से चिन्हित करने में मदद मिलती है।”
बंदर ने आँखें बड़ी करके कहा,
“अच्छा! तो तुम गाँव में अपनी जगह का बोर्ड लगाते हो?” 😄
कुत्ता बोला,
“हाँ भाई, लेकिन मेरा बोर्ड तुम्हारी तरह पेड़ पर चढ़कर नहीं लगाया जाता!”
यह सुनकर बंदर जोर-जोर से हँसने लगा। तभी पास बैठे गाँव के बच्चे भी दोनों की बातें सुनकर हँस पड़े।
बंदर बोला,
“कुत्ता भाई, आज से मैं भी तुम्हारी तरह पैर उठाकर कोशिश करूँगा!”
कुत्ता तुरंत बोला,
“पहले पेड़ से नीचे उतरना सीख लो, फिर मेरी नकल करना!” 😂
दोनों दोस्त हँसते हुए गाँव की गली में आगे बढ़ गए। उस दिन से उनकी दोस्ती और भी मजेदार हो गई।
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